इंडिया का सबसे लंबा ब्रिज बनने में 60 साल क्यों लग गए आज के इस लेख में हम इसी के बारे में विस्तार से बताने वाले है और इसके साथ-साथ इस ब्रिज को बनाने में कितना पैसा लगा, कितने किलोमीटर का ये है और इससे क्या क्या फायदा होने वाला है सबकुछ हम इस लेख में बताएंगे| इसलिए आपको ध्यान से पूरी पोस्ट को पढ़ना है ताकि इस ब्रिज के बारे में पूरी जानकारी मिल सके|
यह ब्रिज बनाने की कल्पना सबसे पहले साल 1962 में कई गई थी और यह दक्षिण मुंबई के सेवरी से नयी मुम्बई के चिर्ले तक बनाया जाना था| लेकिन इस ब्रिज की फिजिविलिटी रिपोर्ट बनाने में महाराष्ट्र सरकार को 34 साल लग गए | उसके बाद भी यह बनना शुरू नहीं हुआ| लेकिन साल 2017 में MMRDA ने इसे रिवाइव किया और साल 2018 से यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ|7500 मजदूरों ने दिन रात मेहनत करके पांच साल में इस ब्रिज को बना दिया|
इस ब्रिज का नाम अटल सेतु है| इसके बन जाने के बाद मुम्बई के लोगों को तथा अन्य जगहों से आने वाले लोगों को काफी फायदा होगा| इससे लोगों का समय बचेगा, पेट्रोल कम खर्च होगा और आने जाने में आसानी भी होगी|इस ब्रिज द्वारा 2 घंटे के सफर में लगभग 20 मिनट ही लगने वाला है यानी घंटों का सफर अब मिनटों में होगा|
इंडिया का सबसे लंबा ब्रिज बनने में 60 साल क्यों लग गए :-
इंडिया का सबसे लंबा ब्रिज बनने में 60 साल क्यों लग गए इसका कारण है कि इस प्रोजेक्ट की feasibility report बनने में ज्यादा समय लग गया और रिपोर्ट बनने के बाद भी कुछ सालों तक इस पर काम शुरू नहीं किया गया| 2018 से इस प्रोजेक्ट पर काम होना शुरू हुआ और अगले पांच साल में यह बनके तैयार हो गया| इस ब्रिज को पांच साल में बनाने में मजदूरों की बहुत मेहनत लगीं है|
अटल सेतु की लम्बाई कितनी है :-
अटल सेतु भारत का सबसे लंबा ब्रिज है और सबसे लंबा समुद्री ब्रिज भी है| इसकी लंबाई 21.8 किलोमीटर है तथा यह छः लेन वाला ब्रिज है|इसकी लंबाई समुद्र के ऊपर लगभग 16.5 किलोमीटर और जमीन पर लगभग 5.5 किलोमीटर है| यह ब्रिज महाराष्ट्र के मुम्बई में बनाया गया है|
अटल सेतु बनने में कितनी लागत लगी :-
अटल सेतु बनाने में 17 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं| इसके बन जाने से मुम्बई के लोगों का काफी पैसा बचने वाला है क्योंकि अब उतनी ही दूरी तय करने में कम पेट्रोल खर्च होगा|
अटल सेतु बनने से क्या क्या फायदा होगा :-
इस ब्रिज के बन जाने से मुम्बई के लोगों का लगभग एक घंटे का समय बचेगा और लगभग एक करोड़ लीटर पेट्रोल की भी बचत होगी| अधिक पेट्रोल के उपयोग से अधिक कार्बन उत्सर्जन भी होता है| ऐसे में अब कम पेट्रोल के उपयोग से लगभग 26 हजार मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा जिससे प्रदूषण में भी कमी आयेगी|अटल सेतु बन जाने से मुम्बई के लोगों को भारी ट्रैफिक से भी निजात मिलेगा |
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इसको बनाने में लगभग 177903 मीट्रिक टन स्टील और 504253 मीट्रिक टन सीमेंट का इस्तेमाल हुआ है| अनुमान है कि इस पर लगभग 70 हजार वाहन प्रतिदिन चलेंगे और इसका जीवनकाल 100 वर्ष होगा| इस ब्रिज पर गाड़ी चालकों को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से यात्रा करने की अनुमति होगी|
कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यदि आप इस ब्रिज से कार से एक बार जाते हैं तब आपको 250 रुपए टोल टैक्स देना होगा और यदि रिटर्न भी आते हैं तो 375 रुपए और देंने होंगे | कार का डेली पास 625 रुपए, महीने भर का पास 12500 रुपए में मिलेगा ऐसे में एक साल का लगभग डेढ़ लाख रुपए लगने वाले हैं|
